भ्रष्टाचार की होली-
भ्रष्टाचार की होली जलाएं। मन के भीतर पाप की होली जलाएं। मित्रों! यह कदापि न कहिएगा कि आप पाक साफ़ हैं! तो फिर मान लेते हैं कि हम आत्म मंथन के युग में प्रवेश कर चुके हैं।
भ्रष्टाचार की होली जलाएं। मन के भीतर पाप की होली जलाएं। मित्रों! यह कदापि न कहिएगा कि आप पाक साफ़ हैं! तो फिर मान लेते हैं कि हम आत्म मंथन के युग में प्रवेश कर चुके हैं।
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