Sunday, 31 March 2013

फुलवा भार न  लै  सके, कहै सखिन सो रोय।
ज्यों ज्यों भीजै कामरी, त्यों त्यों भारी होय।। 

Thursday, 28 March 2013

मुल्क की सियासत

मुल्क की सियासत में दीमक लग चुके हैं। हर इंसान परेशान है। वह सोचता है कि आने दो बच्चू अबकी बारी चुनावों में नेता जी को सबक सिखाएंगे। चुनाव आता है तब तक जीता हुआ जनप्रतिनिधि बाहुबली और माननीय के रूप में तब्दील हो जाता है। कौन जाए आफत मोल लेने……। भारतीय लोकतांत्रिक संस्करण में सभी छोटे मोटे सामंत विधायक और सांसद बन चुके हैं। बड़े पूंजीपतियों के लिए राज्य सभा का दरवाजा खुला रहता है।   

Tuesday, 26 March 2013

 ..............तमाम झंझावातों के बाद भी होली मुबारक। महंगाई से टूटी हुई जनता को भी  होली मुबारक। 

भ्रष्टाचार की होली

भ्रष्टाचार की होली-
भ्रष्टाचार की होली जलाएं। मन के भीतर पाप की होली जलाएं। मित्रों! यह कदापि न कहिएगा कि आप पाक साफ़ हैं! तो फिर मान लेते हैं कि हम आत्म मंथन के युग में प्रवेश कर चुके हैं।

Friday, 22 March 2013

मकसद गलत है-
पुलिस और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए न कि विरोधी सियासी दलों के उत्पीड़न के लिए। द्रमुक ने जब तक कांग्रेस का साथ दिया तब तक वह ईमानदार था, समर्थन वापस लेते ही वह बेईमान कैसे हो गया? समाजवादी पार्टी भी सी बी आई और अन्यान्य जांच एजेंसियों के इस्तेमाल से भयभीत है वरना अब तक समर्थन वापस हो चुका होता।